- World Wide
- International
- National
- State
- Union Territory
- Capital
- Social
- Political
- Legal
- Finance
- Education
- Medical
- Science & Tech.
- Information & Tech.
- Agriculture
- Industry
- Corporate
- Business
- Career
- Govt. Policy & Programme
- Health
- Sports
- Festival & Astrology
- Crime
- Men
- Women
- Outfit
- Jewellery
- Cosmetics
- Make-Up
- Romance
- Arts & Culture
- Glamour
- Film
- Fashion
- Review
- Satire
- Award
- Recipe
- Food Court
- Wild Life
- Advice
सम्मोहक व्यक्तित्व के धनी हैं मोहन यादव
- by
- Dec 14, 2023
- 2279 views
-कृष्णमोहन झा, लेखक सहारा मीडिया समूह के स्टेट ब्यूरो हेड
हाल में ही संपन्न पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने के बाद जब इन राज्यों में भाजपा विधायक दल के नेता के चयन पर विचार विमर्श प्रारंभ हुआ तो पार्टी हाईकमान ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालने के लिए विष्णु देव राय के रूप में बिल्कुल नये चेहरे का चयन करके सबको चौंका दिया था और इसके साथ ही यह संभावनाएं बलवती प्रतीत होने लगीं कि मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री पद के लिए जिन वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें से शायद किसी को भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने का सौभाग्य नहीं मिल सकेगा और पार्टी हाईकमान छत्तीसगढ़ के समान ही मध्यप्रदेश में भी किसी नये चेहरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पद की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला कर चुका है। ये संभावनाएं उस समय हकीकत में बदल गई जब पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के मंत्री और हाल के चुनावों में उज्जैन दक्षिण सीट से निर्वाचित डॉ मोहन यादव को जब राजधानी भोपाल में सोमवार शाम आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया। नई दिल्ली से आए तीन केंद्रीय पर्यवेक्षकों मनोहर लाल खट्टर, डा के लक्ष्मण और आशा लाकड़ा की उपस्थिति में इस बैठक में जब राज्य के निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा विधायक दल के नेता पद हेतु डा मोहन यादव का नाम प्रस्तावित किया उसके पूर्व तक किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि बैठक में पीछे से दूसरी पंक्ति में बैठे उज्जैन दक्षिण से तीसरी बार विधायक चुने गए डा मोहन यादव की मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी होने जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि शायद डा मोहन यादव को भी हाईकमान के इस फैसले का अंदाजा नहीं था , न ही वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। भाजपा कार्यालय में विधायक दल की बैठक शुरू होने के बाहर जो पार्टी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री पद हेतु अपने अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी कर रहे थे उनमें डॉ मोहन यादव के समर्थक नगण्य थे । डा मोहन यादव को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपे जाने का फैसला अप्रत्याशित भले ही ह़ो परंतु उससे यह संदेश तो मिलता ही है कि भारतीय जनता पार्टी में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं है।
डा मोहन यादव उच्च शिक्षित राजनेता हैं। विज्ञान स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने विधि स्नातक की उपाधि भी अर्जित की और आगे चलकर उन्हें राजनीतिक विषय में पीएचडी भी अवार्ड की गई। इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका भव्य व्यक्तित्व उनकी उच्च शिक्षा की ही देन है। छात्र जीवन में ही उनके अंदर मौजूद नेतृत्व के गुण उजागर होने लगे थे। उज्जैन के प्रतिष्ठित माधव साइंस कालेज में जब उन्हें छात्र संघ का अध्यक्ष चुना गया था तभी ये संकेत मिलने लगे थे कि सबको सबको साथ लेकर चलने का मिलनसार स्वभाव और कुशल नेतृत्व की अद्भुत क्षमता एक दिन उन्हें ऐसे मुकाम तक पहुंचा देगी जहां उनका व्यक्तित्व और कृतित्व दूसरों के लिए प्रेरणा का विषय बन जाएगा। आज़ वह दिन आ चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि डा मोहन यादव को कभी किसी पद की चाह नहीं रही लेकिन उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती गई और हर जिम्मेदारी के निष्ठापूर्वक निर्वहन उनके लिए उन्नति के नये सोपान तय करने का माध्यम बनता रहा। उज्जैन विकास प्राधिकरण और मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष पदों पर मोहन यादव का कार्य काल अत्यंत सराहनीय रहा। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी योग्यता का सम्मान करते हुए उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर उच्च शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी जिसे उन्होंने निष्ठापूर्वक निभाया और उच्च शिक्षा मंत्रीजी के रूप में अनेक ऐसे फैसले लिए जो मिसाल बन चुके हैं। डा मोहन यादव अतीत में स्काउट गाइड रह चुके हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है।वे छात्र जीवन में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए थे। अनुशासन उनकी रंग रग में समाया हुआ है। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में प्रदेश के महाविद्यालयों में अनुशासन और शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए डा यादव ने गंभीरता से प्रयास किए। केंद्र सरकार द्वारा घोषित नयी शिक्षा नीति को प्रदेश में लागू करने में मोहन यादव के प्रयासों को केंद्र सरकार से विशेष सराहना मिली। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा के हाईकमान द्वारा उनके चयन का एक आधार यह माना जा रहा है कि ओबीसी वर्ग से आते है । पार्टी को भरोसा है कि इसका लाभ पार्टी उसे आगामी लोकसभा चुनावों में मिलेगा। परंतु यह मानना भी ग़लत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री पद पर उनके चयन में उनकी संघ की पृष्ठभूमि की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक दल के नेता पद के चुनाव हेतु केंद्र से जो तीन पर्यवेक्षक भेजे गए थे उनमें प्रमुख हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का भी संघ से जुड़ाव रहा है।
संबंधित पोस्ट
Follow Us On
Subscibe Latest News
SUBSCRIBE US TO GET NEWS IN MAILBOX
लाइव क्रिकेट स्कोर
शेअर मार्केट
Ticker Tape by TradingView
Stock Market by TradingView

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar