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विशेष श्रेणी की महिलाएं 20 से 24 सप्ताह तक के गर्भ का करा सकती हैं समापन
-एमपीटी एक्ट में 2024 में किया गया संशोधन, पहले 20 सप्ताह तक वैध माना गया था
-बौंसी रेफरल अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं को गर्भ समापन को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
बांका, 20 अगस्त। सुरक्षित गर्भ समापन को लेकर बौंसी रेफरल अस्पताल में शनिवार को आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में 38 आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं और इसका आयोजन सांझा प्रयास नेटवर्क द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सेवा भारती सेवापुरी संस्था के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रितेश रंजन ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि विशेष श्रेणी की महिलाओं के गर्भ समापन की अवधि को 20 से 24 सप्ताह तक बढ़ाया गया है। पहले यह अवधि 20 सप्ताह तक ही था, लेकिन 2021 में इसमें संसोधन किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान रितेश रंजन ने बताया कि 1971 से पूर्व किसी भी प्रकार का गर्भ समापन अवैध माना जाता था। गर्भ समापन के लिए बड़ी कठिनाइयां होती थीं। अनेक तरह के घरेलू उपायों से गर्भ समापन करने की प्रक्रिया के कारण महिलाओं की मौत तक हो जाती थी। उसे रोकने के लिए 1971 में एमटीपी एक्ट बना। इसके बाद से सुरक्षित गर्भ समापन की प्रक्रिया शुरू हुई। अज्ञानता के कारण गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कुछ खास कमी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि 1971 के प्रावधानों के अनुसार गर्भ समापन कई शर्तों के साथ वैध माना गया। एमटीपी एक्ट में 2021 में संशोधन किया गया। इससे विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए 24 सप्ताह तक के गर्भ को शर्तों के अनुसार समापन कराया जा सकता है।
अविवाहित महिलाएं भी करा सकेंगी गर्भ समापनः रितेश रंजन ने बताया कि पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भ समापन को मान्य किया गया है। किसी भी महिला या उसके साथी के द्वारा प्रयोग किए गए गर्भनिरोधक तरीके की विफलता की स्थिति में अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन सेवाएं दी जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सप्ताह तक एमटीपी के लिए एक आरएमपी और 20 से 24 सप्ताह के लिए दो आरएमपी की राय होनी चाहिए।
गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखना जरूरीः इतना ही नहीं, रितेश रंजन ने कहा कि गर्भ समापन के लिए गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखा जाना आवश्यक है। इसका किसी भी हाल में उल्लंघन नहीं होना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में इस तरह की जानकारी साझा करने के लिए कहा गया। साथ ही इच्छुक और जरूरतमंद महिलाओं को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया। इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार, हेल्थ मैनेजर मनोज कुमार, बीसीएम उद्धव कुमार उपस्थित रहे।
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Dr. Rajesh Kumar